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हसनम्बा मंदिर : मंदिर जो वर्ष में केवल 7 दिन ही खुलता है

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 आज हम जिस मंदिर के विषय में बात करने वाले हैं, वह मंदिर अपने चमत्कारिक रहस्यों और रहस्यमयी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। साथ ही वह मंदिर दीपावली के समय वर्ष में केवल 7 दिन ही खुलता है। यह मंदिर है कर्नाटक का हसनम्बा मंदिर। हसनम्बा मंदिर  हसनम्बा मंदिर कर्नाटक के हासन जिले में स्थित एक प्राचीन और प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है। यह देवी शक्ति(मां अम्बा) को समर्पित है और अपनी रहस्यमयी परंपरा के लिए जाना जाता है। जिले का नाम हसन भी देवी हसनम्बा से लिया गया है। यहां माता अम्बा को हसन की पीठासीन देवी के रूप में माना जाता है। हसनम्बा का अर्थ कन्नड़ में 'मुस्कुराती माता' होता है। प्राचीन काल में हसन को 'सिहमासनपुरा' के नाम से बुलाया जाता था। यह मंदिर अपनी चमत्कारी शक्तियों और चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है। इस मंदिर के कपाट दीपावली के दौरान वर्ष में केवल 7 दिन ही खोले जाते हैं और बाकी 358 दिन बंद रहता है। मंदिर में लोग पत्तों में अपनी मनोकामनाएं लिखकर माता को कहते हैं। इस मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में 'होयसल वंश' के राजा द्वारा किया गया था। इसके दर्शन करने से लोगों की मान्यता...

जगन्नाथ मंदिर : मंदिर जहां है श्री कृष्ण का हृदय और जिसकी मूर्तियां है अधूरी

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 हमारे भारत देश में असंख्य मंदिर हैं जो अपने अद्भुत वस्तुकला और अपने रहस्यों के लिए प्रसिद्ध होने के साथ लोगों को अपनी और आकर्षित करते हैं। साथ ही लोगों को उनके रहस्यों को जानने का रुचि भी होता है। ऐसा ही एक मंदिर है जो भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्री कृष्ण को समर्पित है। यह मंदिर है श्री जगन्नाथ मंदिर। जगन्नाथ मंदिर पुरी  जगन्नाथ मंदिर उड़ीसा के पुरी शहर में स्थित एक विशेष हिंदू मंदिर है। यह भगवान जगन्नाथ (श्रीकृष्ण) को समर्पित है। साथ ही यह मंदिर चार धामों में से एक है। मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु अपने चारों धामों के यात्रा के दौरान पुरी में भोजन करते हैं। यह मंदिर प्रत्येक वर्ष अपने विशाल रथ यात्रा के लिए भी बहुत प्रसिद्ध है जिसमें भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अपने रथों पर सवार होकर पुरी नगरी का भ्रमण करते है। इसकी वास्तुकला कलिंग शैली की है। इसे विश्व के रहस्यमय मंदिरों में से एक माना जाता है। इस मंदिर का उल्लेख प्राचीन ग्रंथो जैसे -ब्रह्म पुराण, नारद पुराण, स्कंद पुराण और पद्म पुराण में भी मिलता है। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर का अस्तित्व सतयुग के आ...

सोमनाथ मंदिर : वह मंदिर जिस पर 17 बार आक्रमण हुआ।

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 आज हम जिस मंदिर के विषय में बात करने वाले हैं वह मंदिर  प्राचीन भारत के सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है। यह मंदिर प्राचीन काल में अपने ऊपर हुए अनेक आक्रमणों से कई बार ध्वस्त हुआ, परंतु फिर भी कई बार पुनर्निर्माण होकर आज भी अपने अस्तित्व में है। साथ ही इस मंदिर का निर्माण हर युग में हुआ और हर युग में इसका नाम भी बदलता रहता है। यह मंदिर है सोमनाथ का मंदिर।   सोमनाथ मंदिर सोमनाथ मंदिर गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में बेरावल बंदरगाह में स्थित भगवान शिवजी का एक प्रमुख ज्योतिर्लिंग है। यह शिवजी के 12 ज्योतिर्लिंगों में से पहला ज्योतिर्लिंग है। यह हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक स्थल है। यह मंदिर कपिला, हिरण्या और सरस्वती नदियों के त्रिवेणी संगम पर है। इस मंदिर पर विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा कई बार आक्रमण करके इसे धस्त किया गया, परंतु इस मंदिर को भारतीयों द्वारा फिर से कई बार पुनर्निर्माण कर लिया गया। ऐसा मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण हर युग में किया गया है। शास्त्रों के अनुसार इस मंदिर का निर्माण स्वयं चंद्र देव ने किया था। साथ ही श्रीकृष्ण ने इसी स्थान पर अपना...

बेंजामिन नेतनयाहू: फिलिस्तीन के सबसे बड़े दुश्मन जिसने अपने कंधे पर अपने राष्ट्र के लिए गोली खाई और अपने देश के लिए सबसे लंबे समय तक राष्ट्रपति बने

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 यह कहानी है उस व्यक्ति की जो फिलिस्तीन का सबसे बड़ा कट्टर दुश्मन माना जाता है, उसने न सिर्फ अपने राष्ट्र के लिए गोली खाई बल्कि देश के लिए कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनों में हिस्सा लिया और अपने राष्ट्र का सबसे लंबे समय तक के प्रधानमंत्री बने। यह कहानी है भारत के सबसे अच्छे मित्र इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू की।                     प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू  बेंजामिन नेतन्याहू का जन्म 21 अक्टूबर 1949 को तेल अवीव, इजराइल में हुआ था। वह एक इसराइली प्रधानमंत्री और एक राजनायिक हैं। उन्हें बचपन में 'बीबी' बुलाया जाता था। उनके पिता का नाम बेंजियन नेतनयाहू था जो एक इतिहासकार थे और यहूदियों के इतिहास के बारे में लिखते थे। उनकी माता का नाम त्ज़िला सेगल था। उनका बचपन कुछ समय पश्चिमी जेरूसेलम और फिर संयुक्त राज्य अमेरिका में बीता। वह शेल्टनहम हाई स्कूल से ग्रेजुएट हुए। वह 1967 में इसराइल वापस आकर इजरायली डिफेंस फोर्स में शामिल हो जाते हैं। उन्होंने 1967 से लेकर 1972 तक आर्मी में अपनी सेवा दी। युद्ध के दौरान उन्हें गोली भी लगी।इसक...

एपीजे अब्दुल कलाम: एक साधारण लड़के की अखबार बेचने से लेकर भारत को मिसाइल तकनीकी के क्षेत्र में मजबूत बनाने और देश का प्रथम नागरिक बनने तक की यात्रा

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 यह कहानी है उस एक सधारण लड़के की जिसने कभी अपना घर चलाने के लिए बचपन में अखबार बांटा, रात दिन कई वर्षों तक अपने कठोर परिश्रम से भारत को मिसाइल तकनीकी के क्षेत्र में शक्तिशाली बनाया और देश का प्रथम नागरिक यानी राष्ट्रपति बने। हम जिसके विषय में  बताने जा रहे हैं देश के मिसाइल मैन के नाम से जाना जाने वाले हमारे देश के 11वें राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम। APJ Abdul Kalam डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को रामेश्वरम, तमिलनाडु में एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। उनका पुरा नाम अबुल पाकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम था। उनके पिता का नाम जैनुलाब्दीन मराकायार एक नाविक थे और माता का नाम आशियम्मा एक गृहणी थी। कलाम का परिवार आर्थिक रूप से बहुत ही गरीब था। उनके पिता का एक छोटा सा नाव था जिसे वह मछुआरों को किराए पर दते थे और तीर्थ यात्रियों को अपने नाव से सैर कराते थे। उनके पिता बहुत ही अनुशासित व्यक्ति थे और वह स्थानीय मस्जिद के इमाम भी थे। उनकी बातों में गहरी आध्यात्मिकता थी। कलाम के मन में उनके अपने पिता के बातों का बहुत प्रभाव पड़ता था। बचपन उन्हीं के बातों को सुनकर उनके मन में...

सरदार वल्लभभाई पटेल: भारत को एक सूत्र में पिरोनेवाले लोह पुरुष

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 आज हम एक ऐसे महान व्यक्ति के विषय में बात करने वाले हैं जिन्होंने हमारे देश को एकजुट किया और हमारे राष्ट्र के अस्तित्व को विश्व में बचा कर रखा।             15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों ने हमारे देश को आजाद तो किया, परंतु भारत से एक अलग राष्ट्र पाकिस्तान का भी निर्माण करके चले गए। इसके साथ ही भारत 562 अलग-अलग देसी रियासतों में बांटा हुआ था। इन रियासतों को यह विकल्प दिया गया था कि वे चाहे तो भारत में विलय हो जाए या अपना स्वतंत्र राष्ट्र बना लें। इससे सभी राजाओं में अपना स्वतंत्र राष्ट्र बनाने की मंशा ने जन्म लिया। यह एक बहुत बड़ी समस्या थी और इससे हमारे भारतवर्ष का अस्तित्व खतरे में हो सकता था। इस दौर में भारत के इन 562 देसी रियासतों को एक सूत्र में बांधकर एकीकरण करने का कार्य एक व्यक्ति को दिया गया जिसे उन्होंने बहुत अच्छे से पूरा किया और हमारे राष्ट्र को एक किया। वह महान व्यक्ति हैं लोह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल। आज हम जानने वाले हैं उनके जीवन के विषय में।                        सरदार वल्लभभाई ...

भारतीय महिला क्रिकेट टीम‌ की सफलता

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 आज की कहानी है हमारे पूरे भारत देश और हमें गौरवान्वित करने वाली और हमें सबसे बड़ी जीत दिलाने वाली भारतीय महिला क्रिकेट टीम की। अब हमारी भारतीय महिला क्रिकेट टीम ICC Women's World Cup 2025 की फाइनल मैच जीतकर विश्व चैंपियन बन गई है। यह केवल एक जीत नहीं है, बल्कि एक नए युग की शुरुआत है। 2 नवंबर 2025 यह वह तारीख है जब महिला क्रिकेट टीम ने एक इतिहास रच दिया है और अपना एक नया अध्याय का शुरुआत किया है। यह देश के 146 करोड़ लोगों की सोच बदलने वाली जीत है। पूरे 52 वर्षों के लंबे प्रतिक्षा के बाद भारत की बेटियों ने वह कार्य कर दिया है जिसे लोग एक बहुत दूर का सपना मानते थे। अपने संघर्ष, आंसु, हिम्मत की आग और आलोचनाओं से बनी इस टीम ने पहली बार ODI वर्ल्ड कप जीता है। इस जीत के बाद पूरे देश में एक बार फिर से दिवाली मनाया गया। यह जीत केवल भारत की 15 महिला क्रिकेट टीम की नहीं, बल्कि यह हर उस लड़की की जीत है जिसने अपने जीवन में कुछ अलग करने का सब सपना देखा है। साथ ही यह देश के उन 70 करोड़ महिलाओं की भी जीत है जीने लोगों की रूढ़िवादी बातों का भी सामना करना पड़ता है।         ...