बेंजामिन नेतनयाहू: फिलिस्तीन के सबसे बड़े दुश्मन जिसने अपने कंधे पर अपने राष्ट्र के लिए गोली खाई और अपने देश के लिए सबसे लंबे समय तक राष्ट्रपति बने

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 यह कहानी है उस व्यक्ति की जो फिलिस्तीन का सबसे बड़ा कट्टर दुश्मन माना जाता है, उसने न सिर्फ अपने राष्ट्र के लिए गोली खाई बल्कि देश के लिए कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनों में हिस्सा लिया और अपने राष्ट्र का सबसे लंबे समय तक के प्रधानमंत्री बने। यह कहानी है भारत के सबसे अच्छे मित्र इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू की।

                    प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू 

बेंजामिन नेतन्याहू का जन्म 21 अक्टूबर 1949 को तेल अवीव, इजराइल में हुआ था। वह एक इसराइली प्रधानमंत्री और एक राजनायिक हैं। उन्हें बचपन में 'बीबी' बुलाया जाता था। उनके पिता का नाम बेंजियन नेतनयाहू था जो एक इतिहासकार थे और यहूदियों के इतिहास के बारे में लिखते थे। उनकी माता का नाम त्ज़िला सेगल था।

उनका बचपन कुछ समय पश्चिमी जेरूसेलम और फिर संयुक्त राज्य अमेरिका में बीता। वह शेल्टनहम हाई स्कूल से ग्रेजुएट हुए। वह 1967 में इसराइल वापस आकर इजरायली डिफेंस फोर्स में शामिल हो जाते हैं।

उन्होंने 1967 से लेकर 1972 तक आर्मी में अपनी सेवा दी। युद्ध के दौरान उन्हें गोली भी लगी।इसके बाद वह 1972 में आर्किटेक्चर की पढ़ाई के लिए MIT , संयुक्त राज्य अमेरिका चले गए। फिर वह 1973 के योम कीपर युद्ध में अपनी सेवा देने के लिए वापस इसराइल आ गए। अपनी सेवा देने के बाद वह वापस अमेरिका गए और बेन नीते के नाम से आर्किटेक्चर में बैचलर की डिग्री1975 में पुरी की। फिर उन्होंने 1976 में MIT स्लोन स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट अपनी मास्टर डिग्री पुरी की। 1976 में एक ऑपरेशन के दौरान उनके बड़े भाई योनातन नेतन्याहू की मृत्यु हो जाती है, वह भी इजरायली आर्मी में शामिल थे। इसका बेंजामिन नेतन्याहू पर गहरा असर पड़ा। उन्होंने 1976 से 1978 तक बोस्टन कंसलटिंग ग्रुप में इकोनामिक कंसल्टेंट के रूप में काम किया। इसके बाद वह सब कुछ छोड़ के 1978 में इसराइल वापस आ गए। उन्होंने 1978 से 1980 के बीच जोनाथन नेतन्याहू एंटी टेरर संस्था को चलाया। वह 1984 से 1988 तक यूनाइटेड नेशंस के लिए इजरायली एंबेसडर के रूप में कार्यरत थे। वह 1988 में भी शामिल हए और लिकुड पार्टी को ज्वाइन किया। उन्हें शुरू में डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर बनाया गया। उन्हें लिकुड पार्टी की ओर से 1996 के इजरायली लेजिसलेटिव इलेक्शन में प्रधानमंत्री के पद के लिए दावेदार बनाया गया। वह चुनाव जीते और इजराइल के प्रधानमंत्री बन गए। प्रधानमंत्री नेतन्याहू 1997 में मोसाद को हमास लीडर खालिद मशाल को मारने का अधिकार दे दिया। वहां 1999 में इलेक्शन चुनाव हार गए और कुछ समय के लिए उन्होंने राजनीति छोड़ दिया। वह वर्ष 2000 में  राजनीति में वापस आ गए। उन्हें वर्ष 2002 में उस समय के प्रधानमंत्री एरियल शेरान द्वारा विदेश मंत्रालय के पद के लिए नियुक्त किया गया।
              पूर्व इजराइली प्रधानमंत्री एरियल शेलोन
फिर 2003 में विदेश मंत्रालय का पद को सेल्वन शेलोम को और बेंजामिन नेतन्याहू को वित्त मंत्री का पद दिया गया।
               पूर्व इजरायली विदेश मंत्री सेल्वन शेलोम
उन्होंने इस पद को प्रसन्नता पूर्वक स्वीकार किया। 2007 में उन्हें लिकुड पार्टी का चेयरमैन और प्रधानमंत्री पद के लिए दावेदार बनाया गया। उन्होंने 2009 के चुनाव को जीता और 2009 से 2021 तक वह दूसरी बार इजराइल के प्रधानमंत्री बने। फिर वह 2022 से अभी तक तीसरी बार इसराइल के प्रधानमंत्री हैं। तो यह थी इसराइल के वर्तमान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू हो की कहानी।
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