आज हम जिस व्यक्ति के विषय में बात करने वाले हैं उन्होंने अपनी पढ़ाई परेशानियों के करण 9 वर्ष की आयु में ही छोड़ दिया। उन्हें अपने परिवार के सहायता के लिए छोटे-मोटे काम करने पड़े। उन्होंने जिस कंपनी में काम किया उसी कंपनी के बॉस ने उसके द्वारा बनाए गए इलेक्ट्रिकल सॉकेट को स्वीकार नहीं किया, परंतु वे हरे नहीं और अपने विश्वास के दम पर उसी सॉकेट से अरबों की कंपनी को बना दिया। वह व्यक्ति हैं जापान के सबसे बड़े उद्योगपति कोनोसुके मात्सुशिता।
कोनोसुके मात्सुशिता
प्रारंभिक जीवन और संघर्ष
कोनोसुके मात्सुशिता का जन्म 27 नवंबर 1894 को वाकायामा, जापान में हुआ था। उनके पिता एक जमींदार थे जिसके कारण शुरू में तो कोनोसुके का जीवन बहुत ही अच्छा था। परंतु बाजार में गिरावटी के कारण उनके पिता को व्यापार में भारी नुकसान होता है और उन्हें सारी जमीनें गंवानी पड़ती है। उन्हें अपना मकान भी बेचना पड़ता है और उन्हें गांव छोड़कर शहर आना पड़ता है। कोनोसुके अपने परिवार की खराब आर्थिक स्थिति और अपने घर के परेशानियों के कारण केवल 9 वर्ष की आयु में अपना पढ़ाई छोड़ देते हैं। उनके पिता परिवार के पालन पोषण के लिए छोटे-मोटे काम करते हैं। कोनोसुके को भी अपने परिवार की सहायता के लिए एक दुकान में काम करना पड़ता है। वे सुबह जल्दी उठकर काम पर चले जाते हैं। वे रोज अपने दुकान का साफ सफाई करके छोटे-मोटे काम करने के साथ-साथ अपने मालिक के बच्चों का देखभाल करते हैं। कुछ महीने काम करने के बाद उस दुकान में मंदि हो जाता है जिसके कारण उसके मालिक को उन्हें दुकान से निकालना पड़ता है। उसके बाद कोनोसुके एक साइकिल के दुकान पर काम करते हैं। उन्हें वहां साइकिल के काम साथ साथ बहुत सारे टेक्निकल टुल का ज्ञान हो जाता हैं। वे वहां लगभग 5 वर्ष काम करते हैं।
उनके करियर की शुरुआत
कुछ समय बाद कोनोसुके कुछ नया काम ढूंढने का विचार करते हैं जहां वे काम के साथ-साथ नया चीज सीख सकें। उनमें लगन बहुत ज्यादा थी। उस समय बिजली का शोध किया गया था। बिजली से चलने वाले उपकरण बाजार में क्रांति ला दिया था। भविष्य में बिजली की बढ़ती संभावनाओं को देखकर वे इसी क्षेत्र में जाने का निश्चय करते हैं। उन्हें एक बार 'ओसाका इलेक्ट्रिक लाइट कंपनी' का विज्ञापन मिलता है जिसमें नए कर्मचारियों की आवश्यकता होती है। वे अपना पुराना काम छोड़कर वहां अप्लाई करते हैं और उसे वहां नौकरी मिल जाती है। वे काम करते हुए वहां बहुत कुछ सीख लेते हैं। वे अपने खाली समय में बिजली से संबंधित पुस्तकें पढ़कर उसका छोटा-मोटा प्रयोग भी करने लगते हैं। इसी दौरान उनका विवाह हो जाता है और उन पर जिम्मेदारी बढ़ जाती है।
उनका आविष्कार और संघर्ष
कुछ साल बाद वे अपने काम करने की योग्यता से अपने कंपनी में 'टेक्निकल इंस्पेक्टर' बन जाते हैं। यह पद उस समय बहुत बड़ा होता था। इस दौरान वे एक नया इलेक्ट्रिकल सॉकेट बनाते हैं और अपने बॉस को दिखाते हैं। उनके बॉस को वह पसंद नहीं आता है और यह कहते हुए अस्वीकार कर देते हैं कि उनका वह सॉकेट मार्केट में नहीं चलेगा। परंतु कोनोसुके को अपने बनाए हुए सॉकेट पर पूरा विश्वास होता है। वे अपने इस विश्वास पर अपना नौकरी छोड़ देते हैं और वे अपना स्वयं का काम करने का निश्चय करते हैं।
उनके कंपनी की शुरुआत
वे अपने सॉकेट डिज़ाइन पर काम के लिए अपने कुछ दोस्तों से बात करते हैं। परंतु उनके दोस्त उन्हें यह कह देते हैं कि उनका अपना नौकरी छोड़कर स्वयं का काम करना मूर्खतापूर्ण है वह भी उस प्रोजेक्ट के लिए जिसे उसके बॉस ने भी अस्वीकार कर दिया है। साथ ही वे लोग उन्हें यह भी कह देते हैं तुम ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हो और तुम्हें बिजनेस का अनुभव भी नहीं है और तुम सफल नहीं हो पाओगे। ऐसी स्थिति में कोई भी व्यक्ति टूट जाता है, परंतु कोनोसुके को अपने ऊपर और अपने प्रोजेक्ट पर पूरा विश्वास रहता है। वह अपने कुछ जमा पूंजी के साथ कुछ टूल्स खरीद लेते हैं और काम करने वाले दो व्यक्तियों को रख लेते हैं। वे अपने पत्नी और भाई के साथ ही घर पर छोटा सा फैक्ट्री बना लेते हैं। उनके पास संसाधन काम था, परंतु उनका आत्म विश्वास बहुत बड़ा था। वे सभी के साथ मिलकर फैक्ट्री में सॉकेट बनाना शुरू कर देते हैं और स्वयं ही जगह-जगह जाकर बेचने का प्रयास करते हैं। परंतु उनके सॉकेट को सभी जगह अस्वीकार कर दिया जाता है। उन्हें छोटे-छोटे ऑर्डर ही मिलते हैं जिनसे उनका गुजारा करना भी मुश्किल हो जाता है। इससे उनका स्थिति बहुत ही खराब हो जाता है। कोनोसुके के अवस्था को देखकर उनके दोनों सहकर्मी उनका साथ छोड़ देते हैं। तब वे काम करने के लिए केवल तीन ही लोग बचते हैं। उनकी आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि अपना गुजारा चलाने के लिए उन्हें अपना घर का समान तक बेचना पड़ता है। वे अपना सपना पूरा करने के लिए कर्ज भी लेते है। वे चारों तरफ से कर्ज और रिजेक्शन से भर जाते हैं। ऐसी स्थिति में वे कई बार सोचते हैं कि उन्हें सब कुछ छोड़कर फिर से अपना पुराना नौकरी करना चाहिए। परंतु उनका विश्वास उसे कुछ और दिन प्रोत्साहित करता है। वे फिर से अपने सॉकेट बेचने के लिए निकल जाते हैं और फिर असफल हो जाते हैं। उनकी हालत इतनी खराब हो जाती है की अपनी स्थिति सुधारने के लिए नौकरी ही एकमात्र विकल्प होता है। उनके मित्र भी उन्हें फिर से नौकरी करने का सलाह देते हैं। परंतु उन्हें अपने प्रोडक्ट पर इतना अटूट विश्वास होता है कि वे हार मानने को तैयार नहीं होते हैं।
उनके सफलता की शुरुआत
चारों ओर से अस्वीकृति मिलने और लगातार संघर्ष करने के बाद आखिरकार एक दिन उन्हें 1000 पीसेस का पहला बड़ा आर्डर मिलता है। वही उनके जीवन का एक टर्निंग पॉइंट होता है और उस दिन से उनकी कंपनी को एक गति मिलती है और तरक्की की राह पर आ जाती है। इसके बाद उनकी स्थिति पहले से ज्यादा अच्छी हो जाती है और वे कभी पीछे मुड़कर नहीं देखते हैं। धीरे-धीरे उनकी कंपनी विश्व की बड़ी इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों में शामिल हो जाती है।
आज उस कंपनी में लाखों से भी ज्यादा लोग काम करते हैं। यह उस व्यक्ति ने कर दिखाया जिसने परेशानियों के कारण केवल 9 वर्ष की आयु में अपना पढ़ाई छोड़ देते हैं। और स्वयं पर अटूट विश्वास से अपने दम पर वे यह कर दिखाते हैं। आज हम उनके बनाए हुए कंपनी को 'पैनासोनिक' के नाम से जानते हैं।
उनका विरासत और मृत्यु
कोनोसुके मात्सुशिता 94 वर्ष की आयु में 27 अप्रैल 1989 को इस दुनिया को अलविदा कह देते हैं। परंतु उनकी बनाई हुई कंपनी आज भी पूरे विश्व में फैली हुई है और लाखों लोगों को रोजगार देती है।
कोनोसुके मात्सुशिता की कहानी हमें यह सिखाती है कि यदि किसी व्यक्ति में परिश्रम, धैर्य, आत्मविश्वास और दृढ़ निश्चय हो, तो वह किसी भी असंभव कार्य को संभव बना सकता है।


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