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सनी देओल: कैसे एक भोले शक्ल वाले लड़के ने अपने पहले से ही फिल्म से 80 के दशक में रोमांस के सेंसेशन से उभरा और 90 का दशक आते आते भारतीय सिनेमा में एक्शन फिल्मों की परिभाषा को ही बदल दिया

0 Vishleshan Sansar

 आज हम जिस व्यक्ति के विषय में बात करने वाले हैं उसने न केवल अपने पहले ही डेब्यू फिल्म से लोगों के दिलों में राज किया बल्कि 90 का दशक आते-आते भारतीय सिनेमा में एक्शन फिल्मों की परिभाषा को ही बदल दिया, उनकी फिल्में लोगों के दिलों में राज करने साथ साथ बॉक्स ऑफस में गदर मचाया जिसने अपने करियर में फिल्म के सभी दौरों का अनुभव किया। हम बात करने जा रहे हैं सनी देओल की।

सनी देओल


 सनी देओल का जन्म 19 अक्टूबर 1957 में साहनेवाल ,पंजाब में हुआ था। उनका पूरा नाम अजय सिंह देओल है। उनके पिता का नाम धर्मेंद्र है जो बहुत ही प्रसिद्ध अभिनेता हैं और उनकी माता का नाम प्रकाश कौर है। जब उनके पिता धर्मेंद्र को 1960 में अपनी पहली फिल्म 'दिल भी तेरा हम भी तेरे'से कम मिल गया, तो सनी देओल अपनी माता के साथ पंजाब छोड़ बंबई(अब मुंबई) आ गए। यहीं से उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की। यहां रहते हुए उनका खेलों में रुचि बढ़ाने लगा था। वह बचपन में अपने स्कूल के प्रत्येक खेलों में भाग लेते थे। उन्होंने बचपन में 12 वर्ष की उम्र में है अपने पड़ोस से चुपके से कार लेकर ड्राइविंग सीख लिया था। जब उनका कॉलेज खत्म हुआ, तो उनके परिवार द्वारा उनको खेल-कूद दूरी बनाने को
कहा गया। तब वह फिल्मों में जाने का मन बनाते हैं। इसके लिए वह बर्मिंघम, इंग्लैंड एक्टिंग सीखने चले गए। यहां आकर उन्होंने पहली बार शराब और सिगरेट को हाथ लगाया। उनको यह पसंद नहीं था इसलिए अपना काम जारी रखते हुए अपनी एक्टिंग कोर्स पर ध्यान केंद्रित किया। कुछ सालों बाद अपना एक्टिंग कोर्स बंबई(अब मुंबई) वापस आ गए। उन्हें अपना पहला फिल्म डायरेक्टर राहुल रावेल से मिला जो कई प्रसिद्ध फिल्में दे चुके थे। उन्होंने सनी देओल के लिए शेक्सपियर पर आधारित कहानी बनाई। यह कहानी फिल्म 'बेताब' के रूप में बनाई गई जो वर्ष 1983 में सिनेमाघरों में रिलीज हुई और बहुत ही सफल फिल्म सिद्ध हुआ।

सनी देओल का फिल्म में बहुत ही अच्छा प्रदर्शन था जो लोगों के दिलों म छा गया। उन्हें इसके लिए बेस्ट एक्टर का नॉमिनेशन मिला। इसके बाद उन्होंने कई रोमांटिक फिल्में जैसे -'सनी,मंजिल मंजिल और सोनी महावील' मैं काम किया। जिनके साथ कुछ बड़े-बड़े नाम जुड़े हुए थे। वर्ष 1985 में उन्होंने राहुल रावेल के साथ फिल्म 'अर्जुन' में काम किया। यह फिल्म भी सुपरहिट साबित हुआ।

इस फिल्म मैं उन्हें एक एक्शन हीरो के तौर पर देखा गया। वह उस समय फिल्म इंडस्ट्री में बहुत ही तेजी से उभर रहे थे और इंडस्ट्री भी एक्शन की ओर झुक रही थी। वर्ष 1986 में आई फिल्म 'सल्तनत' में उन्होंने पहली बार अपने पिता धर्मेंद्र के साथ स्क्रीन शेयर किया। वह अलग-अलग फिल्मोंं के साथ लगातार आगे बढ़ रहे थे। इसकेेेे बाद उन्होंने 1989 में फिल्म 'त्रिदेव' में काम किया।
इस फिल्म में वह जैकी श्रॉफ और नसीरुद्दीन शाह के साथ लीड रोल में थे। यह फिल्म भी बहुत ही सफल रहा। फिर उन्होंने एक ऐसे फिल्म में काम किया जिसकी कहानी हीरोइन के लिए लिखी गई थी। यह फिल्म थी 'चालबाज' जिसमें उन्होंने श्रीदेवी और रजनीकांत के साथ काम किया।
यह फिल्म भी बहुत ही सफल रहा। यह फिल्म उन्होंने अपने पिता के द्वारा गया फिल्म 'सीता और गीता' को देख कर किया था। इतने सारे फिल्में करने के बाद उन्हें एक 'एक्शन हीरो' का पहचान तो मिल गया था लेकिन उन पर इसका टैग लगना बाकी था। ऐसे में डायरेक्टर राजकुमार संतोषी उनके जीवन में आए।
राजकुमार संतोषी

उन्होंने फिल्म घायल को कमल हसन को एक लीड एक्टर के रुप में ध्यान रखते हुए लिखा था। परंतु बाद में यह फिल्म किसी कारणवश सनी देओल को मिल गया। फिल्म बनने के बाद वर्ष 1990 में यह रिलीज़ हुआ और यह फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुआ। यह सनी देओल के लिए मिल का पत्थर साबित हुआ और उन्हें अपना पहला फिल्म फेयर अवॉर्ड मिला। इसके बाद उन्होंने कई एक्शन फिल्मों में काम करने के बाद अपने ऊपर एक 'एक्शन हीरो' के टैग को मजबूत कर दिया। वर्ष 1993 में फिल्म 'दामिनी' रिलीज हुई जिसमें सनी देओल के कुछ डायलॉग जैसे 'तारीख पे तारीख' और 'ढाई किलो का हाथ'पूरे फिल्म पर भारी पड़ गया।

दर्शकों के लिए इस फिल्म का मतलब ही सनी देओल बन गया। उनका शानदार आवाज और प्रदर्शन आज भी याद किए जाते हैं। वर्ष 1996 में उनकी और राजकुमार संतोषी की जोड़ी फिल्म 'घातक' के जरिए दिखा।
यह फिल्म बहुत ही सुपरहिट रही। इस फिल्म का प्रत्येक सीन यादगार बन गया। उसके अगले वर्ष ज़िद्दी रिलीज़ हुई और यह भी बहुत बड़ी हिट हुई। कुछ वर्षों बाद इतने सारे सफल फिल्में देने के बाद भी उन्हें किसी बड़े फिल्म मे काम करने का मौका नहीं मिलता है। ऐसे में उन्होंने स्वयं फिल्म निर्माण करने का निश्चय किया। उन्होंने 1999 में फिल्म 'दिल्लगी' से एक नए सफर की शुरुआत की। यह फिल्म ज्यादा सफल नहीं हुई। ऐसे में उन्हें एक बड़े फिल्म की आवश्यकता थी। इसके बाद डायरेक्टर अनिल शर्मा उनके साथ आए। 
अनिल शर्मा 
उन्होंने सनी देओल को लेकर फिल्म 'गदर' बनाई। इस फिल्म ने सनी देओल के करियर को संवारने का काम किया। यह फिल्म बहुत बड़ी सफल सिद्ध हुई। फिल्म के टिकट कलेक्शन और दर्शकों के भीड़ ने एक नया रिकॉर्ड बना दिया। इसी समय उनकी 'इंडियन' और 'मां तुझे सलाम' जैसी फिल्म रिलीज हुई। लोगों ने इन दोनों फिल्मों को भी बहुत पसंद किया। इन फिल्मों के बाद उनका करियर फिर से पटरी पर लौटता हुआ नजर आया। सनी देओल ने उसे 2019 में BJP में शामिल होकर राजनीति में कदम रखा। वह गुरदासपुर के लिए लोकसभा का चुनाव लड़े और जीता। दर्शकों के प्यार और मांग को देखते हुए अनिल शर्मा और सनी देओल फिर से एक साथ आए और उन्होंने 'गदर 2' बनाया।

यह फिल्म वर्ष 2023 में रिलीज़ हुई और इसके फर्स्ट पार्ट की तरह ही इसको भी दर्शकों ने बहुत ही पसंद किया। इस फिल्म ने भी बहुत अच्छा रिकॉर्ड बनया।
                      सनी देओल की निजी जीवन की बात करें, तो उनका विवाह पूजा देओल के साथ हुआ है और उनके दो बच्चे हैं-करण देओल और राजवीर देओल।
सनी देओल और उनकी पत्नी 
सनी देओल और उनके दोनों बेटे 
सनी देओल अपने फिल्मों के शानदार शानदार प्रदर्शन और काम के लिए आज भी लोगों दिलों में राज करते हैं। तो यह थी हमारे सबके चहिते अभिनेता सनी देओल की जिसने फिल्म इंडस्ट्री के सभी दौरों को दिखा।
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